Journal: Int. J Adv. Std. & Growth Eval.
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Impact factor (QJIF): 8.4 E-ISSN: 2583-6528
INTERNATIONAL JOURNAL OF ADVANCE STUDIES AND GROWTH EVALUATION
VOL.: 5 ISSUE.: 8(August 2026)
Author(s): डॉ. बीरेंद्रमणि त्रिपाठी
Abstract:
आधुनिक भारतीय इतिहास में डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और मानव गरिमा के लिए आजीवन संघर्ष किया। विशेष रूप से दलितों और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका योगदान सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक और संवैधानिक—सभी क्षेत्रों में व्यापक था। उन्होंने जाति-आधारित भेदभाव और अस्पृश्यता को भारतीय समाज की गंभीर समस्याओं के रूप में रेखांकित किया तथा इनके उन्मूलन के लिए संगठित आंदोलन चलाया। डॉ. आंबेडकर केवल दलित नेता ही नहीं थे, बल्कि अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता, राजनीतिज्ञ, समाज-सुधारक और चिंतक भी थे। स्वतंत्र भारत के संविधान-निर्माण में प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और वंचित समुदायों के अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। शिक्षा को वे सामाजिक मुक्ति का प्रमुख साधन मानते थे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक समझते थे।
keywords:
डॉ. बी. आर. आंबेडकर, दलित आंदोलन, सामाजिक न्याय, जाति-व्यवस्था, अस्पृश्यता, समानता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संविधान, सामाजिक सुधार।
Pages: 44-48 | 3 View | 1 Download
How to Cite this Article:
डॉ. बीरेंद्रमणि त्रिपाठी. आंबेडकर और दलित आंदोलन. Int. J Adv. Std. & Growth Eval. 2026; 5(8):44-48,